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टाटा के बाद अब महिंद्रा भी लेकर आएगी छोटी कार, लेकिन वजह कुछ और है !

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टाटा मोटर्स ने साल 2008 में अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के रूप में नैनो कार को पेश किया। यह कार देश के मध्मय और निम्न-मध्यम वर्गीय लोगों को ध्यान में रखते हुए पेश की थी। इस कार की खासियत यह थी कि इसकी कीमत शुरुआत में सिर्फ 1 लाख रुपए रखी गई थी। इसके अलावा अपने नाम नैनो की तरह ही यह अन्य कारों के मुकाबले इसकी लंबाई भी काफी कम थी। इसे काफी पसंद भी किया गया था। और अब ऐसी ही छोटे आकार वाली कार लॉन्च करने की योजना महिंद्रा एंड महिद्रा (Mahindra & Mahindra) भी बना रही है। लेकिन महिंद्रा का छोटी कार लॉन्च करने का उद्देश्य कुछ और है।

बड़ी कारों को तरजीह देते हैं भारतीय

दरअसल महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने हाल ही में कहा कि भारतीय लोग अगर कहीं अकेले भी जा रहे हों तो भी वे इस्तेमाल के लिए बड़ी-बड़ी कारों को तरजीह देते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की यही सोच टाटा नैनो (Tata Nano) की ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ असफलता का एक प्रमुख कारण बना। गोयनका आईआईटी कानपुर (IIT-Kanpur) के में पूर्व विद्यार्थियों के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने कहा कि वाहन उद्योग का प्रदूषण (Pollution) में खासा योगदान है और इसे कम करने के लिए हरसंभव तरीके अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिंद्रा भी एक छोटी कार तैयार कर रही है, जो जल्द ही मार्केट में लॉन्च की जाएगी।

कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन कम करने के हर संभव प्रयास हों

उन्होंने कहा कि अभी वाहनों की हिस्सेदारी कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में 7 प्रतिशत और पीएम 2.5 में 20 फीसदी है। इसे कम करने के हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। गोयनका ने कहा कि भारत कनेक्टेड कार के मामले में अगुवाई कर सकता है, क्योंकि भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर काफी तरक्की की है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर काफी काम हो रहा है। बैटरियों, चार्जिंग, दोपहिया वाहन, तिपहिया वाहन जैसी श्रेणियों में समर्पित स्टार्टअप लगातार सामने आ रहे हैं।

ऑटोमोबाइल सेक्टर को चाहिए 14 फीसदी सालाना की वृद्धिदर

गोयनका ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि में वाहन क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा यदि देश को 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर को 1 हजार अरब डॉलर का योगदान देना होगा और ऑटोमोबाइल सेक्टर को 5 साल तक सालाना 14 प्रतिशत की दर से बढ़ना होगा।

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