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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच दोस्ती का क्या है राज़ ? दोनों की निकटता से क्या भारत को होगा कूटनीतिक लाभ?

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आज दुनिया के दो प्रमुख प्रजातंत्रों के शीर्ष नेतृत्व के बीच मुलाकात का पूरे विश्व के लिये महत्व है. सभी बडे देश अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प तथा भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने जा रही बैठकों पर नज़र बनाये रखेंगे.

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प तथा भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की पिछली मुलाकातों में दोनों के बीच दोस्ताना संबंध बनते साफ देखे जा सकते हैं. यही कारण है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत आने से पहले जो भी ट्वीट किये उनमें प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताया और ये भी कहा कि वे मोदी को पसंद करते हैं.

कूटनीति में दो शीर्ष नेताओं के बीच बनी आपसी समझ, उनके व्यक्तिगत दोस्ताना व्यवहार का असर द्वीपक्षीय संबंधों पर पडते देखा जा सकता है. विश्लेषक मोदी तथा ट्रम्प के व्यक्तित्वों की तुलना करते रहे हैं.

ट्रम्प और मोदी दोनों ही खुद को एक समझदार और साथ ही काम निकालने में चतुर नेता की तरह चित्रित करते रहे हैं. ट्रम्प जहां अपनी स्व-निर्मित व्यवसायी की छवि को सामने रखते हैं, वहीं मोदी एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने अपने दम पर राजनीति की, देश की राजनीति में उनका मुकाम स्व-निर्मित है. दोनों ने खुद को इस्टेबलिशमेंट से बाहर के व्यक्ति की तरह दिखाया है, जोकि राजनीतिक घरानों, अफसरशाही की गुटबाज़ी से बाहर रहे हैं.

ट्रम्प और मोदी की छवि ऐसे राजनेताओं की है जिन पर उनके देशवासी भरोसा कर सकते हैं – राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिये. एक नेता जो पहले अपने देश को रखता है और देश को फिर से महान बना देगा। आम जनता में दोनों की यही छवि उनकी राजनीतिक सफलता का अहम कारण रही है.

ट्रम्प और मोदी के अधिकांश राजनीतिक कैम्पेन्स में केवल उनके चेहरे, उनके व्यक्तित्व और और उनके काम का ही बखान होता है. दोनों ‘वन मैन शो’ में यकीन करते नज़र आते हैं. अपना नाम और चेहरा केंद्र में रखने से समर्थकों के बीच उनका एक कल्ट जैसा भी उभरता नज़र आने लगा है.

राष्ट्रवाद को उभारना, राष्ट्रवाद को बढावा देना ये भी दोनों में एक समान नज़र आता है. ट्रम्प और मोदी अपनी नीतियों में अवैध आप्रवास को रोकने पर बल देते हैं. गैर कानूनी रूप से देश में आने वालों पर इनका सख्त रूख है. मोदी और ट्रम्प अपनी इन नीतियों के कारण लिबरल्स के निशाने पर हैं और यही दिखाते हैं कि उन्हें इस तरह की आलोचनाओं का कोई डर नहीं है क्योंकि वे जो भी कर रहे हैं देश हित में कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी तथा राष्ट्रपति ट्रम्प ने आतंकवाद के खिलाफ भी सख्त रूख अपनाए रखा है. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की यह नीति रही है कि सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों से उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठायी और दुनिया से इसके खिलाफ एकजुटता से सख्त रूख अपनाने पर बल दिया. वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प भी इस्लामिक आंतकवाद के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं. उन्होंने इस शब्द से कभी परहेज़ नहीं किया.

व्यक्तित्व में कई समानताएं लिये दोनों नेता, दोस्ती के धरातल पर जब मिल रहे हैं तो पूरे देश की दृष्टि इस बात पर टिकी है कि भारत को किस रूप में इस मित्रता का लाभ मिलता है, व्यापार समझौतों में मुश्किलें दूर हो पाती हैं या नहीं. डगमगाती भारतीय अर्थव्यवस्था को इस समय ऐसे समझौतों की आवश्यकता है जिससे आर्थिक हित पूरे हो सकें. सामरिक, सैन्य समझौते भी वैश्विक स्तर पर हमारे प्रभुत्व को बढाने का काम करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी अगर राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बनी आपसी समझ के चलते देश हित में बडे समझौते करवाने में सफल होते हैं तो ये भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत होगी.

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