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फास्टैग कैश कलेक्शन में निकला फ़ास्ट

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द एंगल

नई दिल्ली

फास्टैग को लेकर अब लोग काफी सहज है और सबसे अच्छी बात तो यह है की कैश कलेक्शन से ज्यादा स्पीड से काम कर रहा है और लोगों को यह पसंद आ रहा है। पहले कैश से टोल देने के चक्कर में अक्सर टोल प्लाजा पर काफी लम्बी कतार में वाहन खड़े रहते थे और समय काफी ख़राब होता था।

जब से फास्टैग अनिवार्य हुआ है तब से टोल चुकाने की प्रक्रिया काफी तेज हो गयी है। कैश कलेक्शन में भी इजाफा हुआ है।

फास्टैग से औसत वसूली 66 फीसदी तक पहुंची

फास्टैग कैश कलेक्शन से आगे निकल चुका है। नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, इससे औसत वसूली 66 फीसदी तक पहुंच गई है। 17 नवंबर से 23 नवंबर तक इससे नेशनल हाईवे अथॉरिटी को 26.4 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था। दिसंबर महीने में 15 से 21 दिसंबर तक कलेक्शन 44 करोड़ हुआ।

 

कैसे काम करता है

यह टोल प्लाजा पर उपयोग में लाया जाता है। यह एक टैग है जो की आपके बैंक अकाउंट से लिंक होता है। इसे गाड़ी के फ्रंट मिरर पर लगाया जाता है। जब आप टोल पर जाते तो है तो आपकी गाड़ी पर लगे इस टैग को स्कैन किया जाता है और आपके  अकाउंट से पैसे कट जाते है। फास्टैग को पहली बार 2014 में लॉन्च किया गया था।

बिक्री हुई तेज

जुलाई महीने में जब फास्टैग के लिए निर्देश जारी किये गए थे तब इसको लेकर लोगों में जागरूकता नहीं और इतनी बिक्री भी नहीं हुई। लेकिन अब हाईवे मिनिस्ट्री ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 1 करोड़ के लगभग की बिक्री हो चुकी है। रोजाना 1 लाख नए फास्टैग की बिक्री हो रही है।

आधिकारिक डेटा के मुताबिक, फास्टैग के इस्तेमाल में काफी तेजी आई है। सरकार 100 पर्सेंट इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को अनिवार्य बनाने की योजना बना रही है।

 

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