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राजस्थान में वर्चस्व के लिये वसुंधरा राजे की नयी रणनीति

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राजस्थान की राजनीति में पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्रदेश में भूमिका और भाजपा में उनके प्रभाव को लेकर अटकलें लगायी जाती रही हैं. प्रदेश में तथा केन्द्रीय स्तर पर भी राजे के विरोधी पार्टी नेता यही प्रचारित करते रहे हैं कि भाजपा की राजस्थान में हार का प्रमुख कारण राजे की आम मतदाता में खराब छवि ही रही.  प्रधानमंत्री मोदी तथा पूर्व भाजपाध्यक्ष अमित शाह की ऱणनीति के लिहाज़ से भी राजे को हाशिये पर धकेलने जैसी बातें सामने आती रहीं जिसका मुख्य कारण राजे के दोनों से संबंध सहज न होना भी रहा.

 

राजस्थान प्रदेश भाजपा में नये अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद, वसुंधरा राजे एक बार फिर अपने आप को साबित करने की नयी कोशिश में जुट गयी हैं. राजे, राजस्थान की भाजपा राजनीति में अपनी स्थिति को फिर से संभालने और उभारने के लिये इस बार एक नये राजनीतिक संतुलन की ओर अग्रसर हो रही हैं.

प्रश्न मध्य प्रदेश में भाजपा की राजनीति का है जिसमें राजे, अपने भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से नये समीकरण करवाने की स्थिति में है. भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी ये चाहता है कि मध्य प्रदेश में सिंधिया, भाजपा के पक्ष में आ जायें और वहां कांग्रेस की कमलनाथ सरकार अपना अस्तित्व सुरक्षित न रख सके. इस दृष्टि से भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को राजे की भूमिका कारगर और उपयोगी लग रही है.

राजे भी इस समीकरण को अपने पक्ष में मान रही हैं. उनका प्रयत्न है कि यदि वे सिंधिया को मध्य प्रदेश में भाजपा के पक्ष में ला पाती हैं तो पार्टी में उनकी स्थिति मज़बूत होगी और उनके राजनीतिक लाभ के अनुकूल बन सकेगी. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी मध्य प्रदेश में वसुंधरा राजे की भूमिका पर निगाह रखे हुये है. यदि राजे अपनी इस कोशिश से वरिष्ठ नेताओं को आश्वस्त कर पाती हैं तो इसका सीधा लाभ, वसुंधरा राजे की राजनीति को मिल सकेगा. सिंधिया द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के भाजपा सरकार के निर्णय का समर्थन करने को भी वसुंधरा राजे की इन्हीं कोशिशों से जोडकर देखा जा रहा है. साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ से सिंधिया के मतभेद जग जाहिर हैं.

केन्द्रीय नेतृत्व की दृष्टि में फिर से विश्वसनीय तथा राजनीतिक दृष्टि से लाभप्रद बनने की स्थिति में वसुंधरा राजे का राजस्थान में राजनीतिक उभार निश्चित है. ऐसा होता है तो वे फिर से राज्य की राजनीति में प्रभावी भूमिका में नज़र आने लगेंगी.

अब देखना है कि मध्य प्रदेश की राजनीति क्या मोड लेती है और वसुंधरा राजे की राजनीतिक हैसियत प्रदेश में बढने की संभावनायें क्या रूप ले पाती हैं?

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