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शरद पूर्णिमा की खीर खाने से अनेक रोगों का होता नाश

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दा एंगल।
जयपुर।
अस्थमा से पीड़ितों के लिए शरद पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है। इस दिन चन्द्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन अस्थमा पीड़ितों को कराया जाता है। वैसे तो भारत में कई पूर्णिमा होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का अपना अलग ही महत्व है। शारदीय नवरात्रि के खत्म होने के बाद शरद पूर्णिमा आती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन महीने की पूर्णिमा तिथि पर शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के चार माह के शयनकाल का अंतिम चरण होता है। माना जाता है कि इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होकर रातभर अपनी किरणों से अमृत की वर्षा करता है।

शरद पूर्णिमा की धार्मिक मान्यता

पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि में चंद्रमा की सोलह कलाओं से अमृत वर्षा होने पर ओस के कण के रूप में अमृत बूंदें खीर के पात्र में भी गिरेंगी जिसके फलस्वरूप यही खीर अमृत तुल्य हो जायेगी, जिसको प्रसाद रूप में ग्रहण करने से प्राणी आरोग्य एवं कांतिवान रहेंगे।

चांदनी रात में खीर खाने का वैज्ञानिक कारण

इसके साथ ही शरद पूर्णिमा की रात को छत पर खीर को रखने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य भी छिपा है। खीर दूध और चावल से बनकर तैयार होता है। दरअसल दूध में लैक्टिक नाम का एक अम्ल होता है। यह एक ऐसा तत्व होता है जो चंद्रमा की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है।

वहीं चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसी के चलते सदियों से ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

एक अन्य वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं।
चार महीने तक विष्णु शयन मुद्रा में होते हैं। भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के मध्य तक भगवान विष्णु शयन मुद्रा में होते हैं। तो उस समय पृथ्वी पर भुखमरी, दरिद्रता व सूखे की देवी अलक्ष्मी का साम्राज्य रहता है परिणाम स्वरुप पृथ्वी पर अधिक पाप बढ़ जाते हैं।
पूर्णिमा के ही दिन जब भगवान कृष्ण अपनी नौ लाख गोपिकाओं के साथ स्वयं के ही नौलाख अलग-अलग गोपों के रूप में महारास कर रहे होते हैं तो मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर घर-घर जाकर सबको दुःख दारिद्रय से मुक्ति का वरदान देती हैं।

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