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शोध कहते हैं कि दिल्ली में अपराध इसलिए भी ज्यादा होते हैं क्योंकि यहां प्रदूषण इतना ज्यादा है

वायु प्रदूषण से हमारी सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में हम सभी जानते हैं लेकिन यह हमारे व्यवहार पर भी उतना ही असर डालता है

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वायु प्रदूषण से हमारी सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में हम सभी जानते हैं. हमें पता है कि हवा अगर ज़हरीली होती जाएगी तो हमें सांस के जरिये होने वाले संक्रमण, दिल की बीमारियां, स्ट्रोक और फेंफड़ों के कैंसर के अलावा डिमेंशिआ (भूलने की बीमारी) और अल्ज़ाइमर्स जैसी मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं. लेकिन हाल ही में इस बात के भी काफी सबूत मिले हैं कि वायु प्रदूषण सिर्फ हमारी सेहत पर ही नहीं, हमारे व्यवहार पर भी असर डालता है.

1970 के दशक में अमेरिका में पैट्रोल से सीसे को निकाल दिया गया. इसके बाद 1990 के दशक में अमेरिका में होने वाले हिंसक अपराधों में 56 फीसदी तक की कमी आ गई. इसे पेट्रोल से सीसा निकालने से जोड़ कर देखा गया. दरअसल सीसे के संपर्क में आने से, खास तौर पर बच्चों में, आवेग और आक्रामकता बढ़ने लगती है और उनका आइक्यू घट जाता है, जो उनमें आपराधिक व्यवहार को बढ़ा सकते हैं.

शंघाई में किये गये एक अध्ययन से पता चला कि कम समय के लिए भी वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से – खास तौर पर सल्फर डाइऑक्साइड के – मानसिक अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों की संख्या बढ़ जाती है. इसी तरह लॉस एंजलेस में हुए एक शोध में सामने आया कि हवा में पारटिकुलेट मैटर (हवा में तैरने वाले अदृश्य और नुकसानदेह कण) की बढ़ी हुई मात्रा के कारण शहरी किशोरों में आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही थी. हालांकि इस समस्या को बढ़ावा देने में बच्चों व उनके माता-पिता के बीच के खराब रिश्तों और माता पिता पर बढ़ते सामाजिक-मानसिक दबाव का भी हाथ था.

आज यह माना जाने लगा है कि वायु प्रदूषण के कारण मस्तिष्क में सूजन हो सकती है. इससे भी बुरा यह है कि पारटिकुलेट मैटर विकसित होते मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ये मस्तिष्क और तंत्रिकाओं के तंत्र को नुकसान पहुंचा कर हमारे व्यवहार पर असर डाल सकते हैं.

आपराधिक व्यवहार

अभी तक मिले सबूतों के आधार पर यह माना जा सकता है कि वायु प्रदूषण गलत व्यवहार को बढ़ावा देता है, खासकर युवाओं में. लेकिन शोध बताते हैं कि इसके असर और भी गंभीर हो सकते हैं. अमेरिका के 9,360 शहरों में किए गए एक अध्ययन से भी यही पता चला है वायु प्रदूषण अपराधों में इजाफा करता है. वायु प्रदूषण से एंग्ज़ाइटी (गहरी चिंता) बढ़ती है, जिसके कारण आपराधिक और अनैतिक व्यवहार में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. अध्ययन का निष्कर्ष था कि जिन शहरों की हवा जितनी ज्यादा प्रदूषित थी वहां अपराध भी उतना ही ज़्यादा था.

यूनाइटेड किंगडम का एक हालिया शोध इस बारे में और भी जानकारी देता है. इस शोध के लिए दो साल के भीतर लंदन में हुए 18 लाख अपराधों की तुलना वहां और उस समय के प्रदूषण के आंकड़ों के साथ की गई. किसी जगह का एयर क्वालिटी इंडेक्स हमें बताता है कि वहां की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है. शोध में पाया गया कि इस इंडेक्स में दस अंकों की बढ़ोतरी होने पर अपराध होने की दर में 0.9 फीसदी का उछाल आ गया.

इसका मतलब यह है कि अधिक प्रदूषण के दिनों में लंदन में अपराध का स्तर बढ़ जाता है. शोध में यह भी पाया गया कि प्रदूषण ने लंदन के सबसे अमीर और सबसे गरीब, दोनों हिस्सों में अपराध पर असर डाला है.

तनाव का किस्सा

खराब गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेने से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल में बढ़ोतरी देखी जा सकती है. यह आपकी जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ा देता है. इस वजह से भी प्रदूषित हवा होने पर अपराध के मामले बढ़ जाते हैं. शोधार्थियों का मानना है कि हवा में प्रदूषण घटाने से अपराध घटाए जा सकते हैं.

और अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह अपराधों में बढ़ोत्तरी का अंतहीन सिलसिला भी बन सकता है. ब्रोकन विंडो थिअरी के मुताबिक अव्यवस्था और आपराधिक व्यवहार और भी अव्यवस्था और अपराधों को जन्म देने का कारण बनते हैं.

अब यह साफ है कि वायु प्रदूषण का बुरा असर सिर्फ स्वास्थ्य और पर्यावरण पर ही नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद तमाम देशों में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ा हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के हर दस में से नौ लोग आज जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं.

हमें अब भी नहीं पता कि विभिन्न प्रदूषक स्वास्थ्य और व्यवहार को को किस-किस तरह प्रभावित करते हैं और यह असर लिंग, आयु, आय वर्ग या भौगोलिक स्थिति के आधार पर कितना अलग हो सकता है. इस पर अभी और शोध होना बाकी है. लेकिन इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि खराब गुणवत्ता वाली हवा के कारण हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. सरकारों को इस पर ध्यान देते हुए सभी ज़रूरी कदम उठाने चाहिए, जैसे बेहतर पब्लिक ट्रासपोर्ट सिस्टम, रिन्यूएबल एनर्जी का प्रयोग और बेहतर कचरा प्रबंधन आदि.

लेकिन साफ हवा में सांस लेने के लिए हमें भी अपने हिस्से के कदम उठाने की ज़रूरत है ताकि हम अपना शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकें.

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