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राजस्थान चुनावों के लिए तीसरे मोर्चे ने भरी हुंकार

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प्रदेश में चुनावों के मद्देनजर आरक्षण आंदोलन से जुड़े सामाजिक नेता अपनी-अपनी जातियों के वोट- बैंक को एकजुट कर राजनीति के नए सियासी गठजोड़ में  लग गए हैं। इसी कड़ी में गुर्जर नेता कर्नल  किरोड़ी सिंह बैसला ने रेबारी समाज और कुछ राजपूत समाज के नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाई है।

साथ ही सीएम वसुंधरा राजे की यात्रा के विरोध में 11 दिन बाद जोधपुर  में  आंदोलन करने की धमकी दी है। बैंसला का कहना है कि कि तीन जातियां आरक्षण के मुद्दे पर एक मंच पर  हैं। ब्राह्मणों के समर्थन का इंतजार है। भाजपा- कांग्रेस से अब तक कुछ नहीं मिला है। ऐसे में आरक्षण की पैरवी करने वाली पार्टी को  ही तीसरे मोर्चे से जुड़ने वाली जातियां वोट देंगी। बैंसला के साथ यह दावा राजपूत आरक्षण मंच के प्रदेश अध्यक्ष संपतसिंह शेखावत और आरक्षण अधिकार मंच के प्रतिनिधि गणेश रेबारी ने भी किया है।

राजनीतिक उथल- पुथल के साथ प्रभावित होंगे पार्टियों के वोट गणित के आंकड़े :  बैंसला के इस बयान से राजनीतिक हलकों के मायने ये है कि प्रदेश में तीसरा मोर्चा खड़ा किए जाने की संभावनाएं प्रबल हो गई है। हालांकि पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक वाजपेयी ने बैठक की थी। उधर आम आदमी पार्टी के प्रदेश समन्वयक देवेंद्र  शास्त्री कह चुके है कि जल्द ही कुछ समाज प्रदेश में एक होकर कांग्रेस- बीजेपी के खिलाफ खड़े मिलेंगे। इससे आगामी विधानसभा चुनाव मे निश्चित तौर पर  उथल-पुथल होने की संभावना है। साथ ही पार्टियों के वोट गणित के आंकड़े भी प्रभावित होंगे।

सीएम के विरोध में सड़कों पर उतरकर इशारा तो सवाई माधोपुर में कर दिया : पिछले दिनों सीएम वसुंधरा राजे की सवाई माधोपुर यात्रा के विरोध में गुर्जर और रेबारी सड़कों पर थे और राजपूत नेता इनके समर्थन में थे। नए सियासी गठजोड़ को भांपकर राज्य सरकार ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े  बैंसला विरोधी गुट हिम्मत सिंह से वार्ता करके मामले का विरोध थामने की कोशिश की थी।

तीसरा मोर्चा से हो सकता है नुकसान : प्रदेश में गुर्जर-रैबारी-राजपूत-ब्राह्मण एक साथ आते है तो कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों को बड़ा नुकसान हो सकता है। राजपूत समाज आनंदपाल के एनकाउंटर बाद से  नाराज चल रहा है। गुर्जरों की नाराजगी समय समय पर आंदोलन करने से जग जाहिर हो चुकी है। बाकी जातियां आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं मिलने का मुद्दा पेंडिंग चल रहा है।

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