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मुख्यमंत्री बोले- प्रदेश में सहकारिता को और मजबूत करने के हों प्रयास, जहां सहकारिता अभियान मजबूत वहां के किसान खुशहाल

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द एंगल।

जयपुर।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेशवासियों को एक और सौगात दी। आज मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उदयपुर के नवनिर्मित ‘दी उदयपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक’ के प्रधान कार्यालय, शाखा भवन तथा चंदेरिया-चित्तौड़गढ़ के सहकार भवन का लोकार्पण किया।

2002 में लेकर आए को-ऑपरेटिव का प्रोग्रेसिव कानून- सीएम

इस मौके पर उन्होंने को-ऑपरेटिव का कोरोना काल में महत्व समझाते हुए कहा कि कोरोना की जंग में को-ऑपरेटिव की बहुत बड़ी भूमिका रही है। क्योंकि आपका नारा ही है, एक सबके लिए, सब एक के लिए। पंडित नेहरू के समय में यह नारा दिया गया था लेकिन कोविड के दौर में इससे ज्यादा मार्मिक बात और भला क्या हो सकती है। कोविड के अंदर यह नारा एकदम फिट बैठता है। इस नारे के आधार पर ही हम कोविड से छुटकारा भी पा सकते हैं। 1958 में को-ऑपरेटिव के लिए पॉलिसी बनाई गई थी तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के द्वारा, 2002 में हमने इसे लेकर नया कानून बनाया तत्कालीन नेता जो को-ऑपरेटिव के काम से जुड़े हुए थे उनके सहयोग से हम ये नया और प्रोग्रेसिव कानून लेकर आए उसका हमें लाभ मिला।

को-ऑपरेटिव मूवमेंट जितना आगे बढ़ेगा उतना ही ज्यादा मिलेगा किसानों को लाभ- सीएम

को-ऑपरेटिव मूवमेंट को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे और ज्यादा आन्दोलन का रूप देने की आवश्यकता है। क्योंकि को-ऑपरेटिव का मूवमेंट जितना आगे बढ़ेगा, उतने लोग ज्यादा जुड़ेंगे, उतना ज्यादा इसका लाभ मिलेगा। हम लोग स्वयं सहायता समूहों की बात करते हैं, हम लोग को-ऑपरेटिव की जीएसएस बढ़ाने की बात करते हैं, हमारी गवर्नमेंट जीएसएस की संख्या भी लगातार बढ़ा रही है, हम चाहते हैं कि ये मूवमेंट बहुत आगे तक बढ़े, हर व्यक्ति तक पहुंचे जो इससे जुड़ना चाहता है या लोगों को मोटिवेट करें जुड़ने के लिए। पिछली बार हमने किसानों को ब्याजमुक्त ऋण दिए थे फसली ऋण के लिए और इस बार हम लोगों ने इसके लिए 25 लाख लोगों 16 हजार करोड़ रुपए के ब्याजमुक्त ऋण देने का लक्ष्य रखा है।

किसान फसलों के उत्पादन के साथ करें उनमें वैल्यू एडिशन- गहलोत

उन्होंने देश में हरित और श्वेत क्रांति की शुरुआत करने का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दौर था जब अमेरिका से हमें गेहूं मांगना पड़ता था, लेकिन जब इंदिरा गांधी जी ने देश में हरित और श्वेत क्रांति की तो हम खाद्यान्न और दुग्ध उप्तादन में आत्मनिर्भर बन गए। जिस तरह पशुपालकों को को-ऑपरेटिव से जोड़ा गया, आज हम गर्व से कह सकते हैं कि इसमें हम काफी हद तक कामयाब हुए हैं। हम दो रुपए प्रतिलीटर पशुपालकों को दूध का बोनस देते हैं, उसका प्रदेश के पशुपालकों पर बहुत बड़ा इम्पैक्ट है। जहां-जहां को-ऑपरेटिव मूवमेंट्स बड़े स्तर पर चलाए गए हैं वहां के किसान आज खुशहाल हैं, फिर चाहे कर्नाटक हो, चाहे तमिलनाडु हो, महाराष्ट्र हो, चाहे गुजरात की। क्योंकि वहां के किसान तमाम चीजों में वैल्यू एडिशन करते हैं, इससे दिन-रात का फर्क पड़ता है और इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।

‘केंद्र सरकार ला रही नए-नए कानून, हमने भी किसानों को दी फसल रहन की सुविधा’

सरकार की ओर से किसानों को दी जा रही सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में इसके लिए संभावनाएं छिपी हुई हैं, मैं चाहता हूं हर गरीब किसान को-ऑपरेटिव मूवमेंट जीएसएस से जुड़े और जितनी जीएसएस की आवश्यकता होगी वो हम लोग खोलेंगे, पर सब लोग जुड़ें और उनके संगठन बनें, उनकी अच्छी ट्रेनिंग हो, जिससे कि आने वाले वक्त के अंदर और मजबूती के साथ में हम लोग राजस्थान के अंदर इस मूवमेंट को आगे बढ़ा सकते हैं। केंद्र सरकार नए-नए कानून ला रही है, हमने भी रहन रखने की सुविधा दी है कि ऐसे उत्पाद के आप चाहें तो भाव आपको कम मिल रहे हैं तो उसको रहन रख दीजिए और उठा लीजिए आप, लोन ले लीजिए बदले के अंदर कम ब्याज के अंदर, सरकार सब्सिडी देगी उसके अंदर, उसके बाद आप जब चाहो तो उसको बेच सकते हो।

चुनाव में किया वादा निभाया, पिछली सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी भी हमने की- गहलोत

किसानों की कर्जमाफी को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि सरकार बनते ही हम लोगों ने कर्जा माफ किया किसानों का, वो फैसला कोई मामूली फैसला नहीं होता है। करीब 8-10 हजार करोड़ रुपया हमने 20 लाख किसानों का माफ किया, हालांकि नेशनल बैंक का माफ नहीं कर पाए हम लोग पर बिना केंद्र सरकार के सहयोग से वो संभव नहीं है। यहां तक कि हमने उस कर्जे को भी माफ किया जिसकी घोषणा पिछली सरकार के समय में हुई थी। उन्होंने 8 हजार करोड़ का कर्ज माफ करने की बात कही थी, केवल 2 हजार करोड़ ही माफ कर पाए, बाकी का हमने माफ किया।

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