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कोयला उद्योग से जुड़े श्रमिक 2 से 4 जुलाई तक करेंगे हड़ताल

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द एंगल।

रांची।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर देशभर में विरोध जताया जा रहा है। अब कॉमर्शियल माइनिंग को मंजूरी समेत केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ केंद्रीय श्रमिक संगठन एटक, बीएमएस, एचएमएस, इंटक और सीटू ने भी कोयला उद्योग में दो से चार जुलाई तक तीन दिवसीय हड़ताल करने का ऐलान किया है। बता दें अगर यह हड़ताल असरदार रहती है तो 3 दिनों में ही कोल इंडिया को अरबों रुपए का नुकसान होगा। हड़ताल से 36 से 40 लाख टन उत्पादन और 40 से 45 लाख टन डिस्पैच प्रभावित होगा। वहीं सीसीएल का तीन लाख टन उत्पादन और चार लाख टन डिस्पैच प्रभावित होगा।

मालूम हो कि फिलहाल लॉकडाउन के कारण भी कोल इंडिया के उत्पादन ग्राफ में गिरावट आई है। वर्तमान में कोल इंडिया रोजाना लगभग 12 लाख टन उत्पादन और 13-14 लाख टन कोयला डिस्पैच कर रही है। लॉकडाउन में पावर प्लांटों से डिमांड कम हो जाने के कारण कोल इंडिया के पास काफी मात्रा में स्टॉक जमा हो गया है।

अप्रेल से जून तक 30 लाख टन कोयला डिस्पैच कर चुका सीसीएल

सीसीएल फिलहाल प्रतिदिन लगभग एक लाख टन उत्पादन तथा सवा लाख टन कोयला डिस्पैच कर रही है। सीसीएल में 31 मार्च तक 13 मिलियन टन का कोल स्टॉक हो गया था। अप्रैल से जून तक सीसीएल कोल स्टॉक से करीब 30 लाख टन कोयला का डिस्पैच कर चुका है।

कल यूनियनों से बात करेंगे सीएलसी

बता दें हड़ताल को लेकर 26 जून को कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने यूनियनों के साथ एक बैठक बुलाई थी। लेकिन इसमें शामिल होने का बीएमएस ने विरोध किया। इसके बाद अन्य सभी चार मान्यता प्राप्त यूनियनों ने भी इस बैठक में शिरकत नहीं की थी। अब 30 जून को डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर सभी मजदूर संगठनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करेंगे। फिलहाल अभी तक सरकार की ओर से पुन: किसी तरह की बैठक की सूचना नहीं आई है।

हड़ताल की तैयारी में जुटीं यूनियनें

इधर हड़ताल को सफल बनाने को लेकर कई दिनों से लगातार मजदूर संगठनों की ओर से एरिया, परियोजना व माइंस में कोयला मजदूरों के बीच पिट मीटिंग की जा रही है। इससे पहले कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में 10-11 जून को पूरे कोयला उद्योग में मजदूर संगठनों‍ ने विरोध दिवस मनाया था। 18 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कुल 41 कोल ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा था कि अब बरसों का लॉकडाउन खुल गया है और कोल माइनिंग में निजी सेक्टर को भी अनुमति दी गई है।

पिछले साल लिया था केंद्र सरकार ने कोयला उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई का फैसला

इस दिन मजदूर संगठनों ने कोल इंडिया की सभी कंपनियों और एरिया मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए प्रबंधन को कोयला सचिव के नाम हड़ताल का नोटिस सौंपा था। मालूम हो कि फिलहाल कोल इंडिया में कार्यरत कर्मियों की संख्या लगभग 2.73 लाख है। 28 अगस्त 2019 को कोयला उद्योग में 100 फीसदी एफडीआइ का फैसला सरकार ने लिया था। इसके बाद कोयला मजदूरों ने 24 सितंबर को ऐतिहासिक हड़ताल की थी।

कोयला श्रमिक संगठनों की ये हैं मांगें

श्रमिक संगठनों की मांग है कि कोयला उद्योग में कॉमर्शियल माइनिंग के फैसले को वापस लिया जाए, कोयला उद्योग के निजीकरण की नीति वापस हो, सीएमपीडीआइ को कोल इंडिया से अलग नहीं किया जाए, ठेका मजदूरों को हाइ पावर कमेटी की अनुशंसा के अनुसार मजदूरी मिले और राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता को पूर्णतः लागू किया जाए।

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