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आम आदमी का जीना हुआ दुश्वार, खुदरा के बाद थोक मूल्य सूचकांक में वृद्धि

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दा एंगल।
नई दिल्ली
आम आदमी की मुश्किलों का कोई अंत होता नहीं दिख रहा है। पहले केन्द्र सरकार ने रसोई गैस के दाम में बढ़ोतरी कर दी। वहीं देश की जीडीपी काफी नीचे चल रही है। इससे महंगाई अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है। दिनोंदिन हर वस्तु के दामों में बढ़ोतरी होती जा रही है।
केन्द्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े आज जारी कर किए गए है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 3 दशमलव एक फीसदी पर आ गई है। साल 2019 की समान अवधि में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2 दशमलव 76 फीसदी थी। इससे पिछले महीने दिसंबर में यह 2 दशमलव 59 फीसदी थी।

तीन महीनों से हो रही वृद्धि

वहीं नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक शून्य दषमलव 58 फीसदी पर थी। अक्टूबर में यह 0.16 फीसदी थी, सितंबर में 0.33 फीसदी और अगस्त में यह 1.17 फीसदी थी। यानी लगातार तीन महीनों से इसमें इजाफा हो रहा है। महीने दर महीने के आधार पर जनवरी में थोक खाद्य महंगाई दर दिसंबर के 11.05 फीसदी के मुकाबले 10.12 फीसदी रही है।

खाना-पीना हुआ महंगा

खुदरा मुद्रास्फीति की बात करें, तो खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गयी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 7.35 फीसदी रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने में यह 1.97 फीसदी रही थी। खुदरा मुद्रास्फीति में यदि खाद्य मुद्रास्फीति की बात की जाए तो जनवरी 2020 में यह 13.63 फीसदी रही जबकि एक साल पहले जनवरी 2019 में इसमें 2.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

हालांकि, यह दिसंबर 2019 के 14.19 फीसदी के मुकाबले कम हुई है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में ऊंची मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया था। अभी हाल में ही केन्द्रीय बजट प्रस्तुत किया गया है। बजट के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि था कि महंगाई पर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा। लेकिन अब तक इसका कोई असर दिख नहीं रहा है।

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