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क्रूड ऑयल के दाम साल के सबसे कम स्तर पर, लेकिन आमजन 5 महीने से कर रहा राहत की उम्मीद

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The Angle

जयपुर।

रोजमर्रा की खाने-पीने और सब्जियों के दाम पहले ही आसमान पर हैं, वहीं बीते 5 महीनों से तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी किसी तरह की कोई राहत नहीं दी है। इससे आम उपभोक्ता पर दोहरी मार पड़ रही है, वहीं गृहणियों के लिए भी घर और रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है और इस साल में पहली बार क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर से भी नीचे आ गई हैं।

क्रूड ऑयल के दाम साल के सबसे निचले स्तर पर, लेकिन आमजन को राहत नहीं

जानकारी के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय से गिरावट का दौर जारी है अब इसकी कीमतें घटते-घटते 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं, जो कि इस साल में सबसे कम है। इसके बावजूद तेल कंपनियों की ओर से आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी तरह की राहत नहीं दी गई है और बीते 5 महीने से दाम स्थिर बने हुए हैं। वहीं तेल कंपनियों की इस मनमानी से उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पिछली बार भी पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले केंद्र ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दी थी राहत

जानकारों का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने पिछले साल पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले धनतेरस पर देशवासियों के हित में बड़ा ऐलान करते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत दी थी, कुछ ऐसा ही ऐलान इस दिवाली पर भी हो सकता है। इस बात की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इस साल के आखिर में यानि नवंबर-दिसंबर महीने में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात जहां पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह का गढ़ है, वहीं दोनों ही राज्यों में फिलहाल भाजपा की सरकार है। ऐसे में पार्टी की कोशिश दोनों ही राज्यों में सरकार रिपीट कर इस गढ़ को बरकरार रखने की होगी। भाजपा की इस रणनीति में पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती बड़ा दांव साबित हो सकती है।

गुजरात-हिमाचल प्रदेश में चुनाव ऐलान के साथ लागू हो जाएगी आचार संहिता

माना जा रहा है कि दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसलिए इससे पहले ही केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में देशवासियों को बड़ी राहत दे सकती है, ताकि आगामी चुनावों में वोटर्स को लुभाया जा सके। वहीं इससे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर भी अपने शासित राज्यों में वैट घटाने का दबाव बढ़ेगा, ताकि वे भी चुनाव में जीत हासिल कर सकें।

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