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मकर संक्रांति पर यूं करें दान-पुण्य, मिलेगा विशेष फल

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जयपुर।

इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जायेगा। दरअसल इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को रात 2 बजकर 08 मिनट पर हो रहा है और शास्त्रों के नियमानुसार अगर मकर संक्रांति का पर्व शाम या उसके बाद पड़ता है तो उसे अगले दिन ही मनाया जाता है। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जायेगा। शास्त्रों में बताया गया है कि संक्रांति के दिन शुरू के छह घंटे के अंदर यदि दान पुण्य किया जाए तो उसका विशेष महत्व होता है। हालांकि 15 जनवरी को पूरे दिन दान पुण्य के कार्य किए जा सकते हैं।

क्या है पर्व को मनाने का महत्व ?

जहाँ तक इस पर्व से जुड़ी विशेष बात है तो मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिण से मकर रेखा की ओर प्रवेश करते हुए उत्तर की ओर बढ़ने लगता है, जो कि ठंड के घटने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं, जो मकर राशि के अधिपति थे। पिता और पुत्र आम तौर पर अच्छी तरह नहीं मिल पाते, इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का एक मौका बनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन देवताओं की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता था। मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता धरती पर अवतरित होते हैं।

पवित्र नदियों में स्नान करते हैं लाखों लोग

सर्दी के मौसम के समापन और फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक समझे जाने वाले मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर लाखों लोग देशभर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। देश के विभिन्न भागों में तो लोग इस दिन कड़ाके की ठंड के बावजूद रात के अंधेरे में ही नदियों में स्नान शुरू कर देते हैं। इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम, वाराणसी में गंगाघाट, हरियाणा में कुरुक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी में श्रद्धालु इस अवसर पर लाखों की संख्या में एकत्रित होते हैं।

इस पर्व पर इलाहाबाद में लगने वाला माघ मेला और कोलकाता में गंगासागर के तट पर लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। अयोध्या में भी इस पर्व की खूब धूम रहती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू में डुबकी लगाकर रामलला, हनुमानगढ़ी में हनुमानलला तथा कनक भवन में मां जानकी की पूजा अर्चना करते हैं। हरिद्वार में भी इस दौरान मेला लगता है जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है।

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का है विशेष महत्व

इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन खिचड़ी का दान देना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। देश के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विशेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है। इस पर्व पर उत्तर प्रदेश में खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व होता है। महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि वस्तुएं अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन कूड़ा करकट जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है।

 

शनिदेव की प्रिय वस्तुओं का करें दान

ज्योतिषियों का कहना है कि सूर्यदेव जब मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं का दान शनिदेव की विशेष कृपा को घर परिवार में लाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करना सौ गुणा फल देता है।

 

राशि के अनुसार दान-पुण्य का मिलता है अधिक महत्व

 

  • मेष- तिल-गुड़ का दान दें, उच्च पद की प्राप्ति होगी।
  • वृष- तिल डालकर अर्घ्य दें, बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी।
  • मिथुन- जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, ऐश्वर्य प्राप्ति होगी।
  • कर्क- चावल-मिश्री-तिल का दान दें, कलह-संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।
  • सिंह- तिल, गुड़, गेहूं, सोना दान दें, नई उपलब्धि होगी।
  • कन्या- पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
  • तुला- सफेद चंदन, दुग्ध, चावल दान दें।
  • वृश्चिक- जल में कुमकुम, गुड़ दान दें, विदेशी कार्यों से लाभ, विदेश यात्रा होगी।
  • धनु- जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा मिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, चारों-ओर विजय होगी।
  • मकर- तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, अधिकार प्राप्ति होगी।
  • कुंभ- तेल-तिल का दान दें, विरोधी परास्त होंगे।
  • मीन- हल्दी, केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, सरसों, केसर का दान दें, सम्मान, यश बढ़ेगा।

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