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गीता गोपीनाथ, जिन्होंने गिरती वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भारत को बताया जिम्मेदार !

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The Angle

जयपुर।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (International Monetary Fund- IMF) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Geeta Gopinath) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त के अनुमान को काफी घटा दिया है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum- WEF) समि‍ट के दौरान आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, कि ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान में 80% की गिरावट के लिए भारत जिम्मेदार है।

गीता गोपीनाथ के वैश्विक वृद्धिदर में गिरावट को लेकर दिए बयान को अहमियत देते हुए, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर तंज कसा है। तो आइए जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर इतना बड़ा बयान देने वाली गीता गोपीचंद कौन हैं।

 

पिछले साल बनीं चीफ इकोनॉमिस्ट, हार्वर्ड में पढ़ाती रही हैं अर्थशास्त्र

पिछले साल अक्टूबर में गीता गोपीनाथ को अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) का चीफ इकोनॉमिस्ट यानि मुख्य अर्थशास्त्री बनाया गया। उन्होंने 1 जनवरी, 2019 से इस पद को संभाला। वह इस दायित्व को संभालने वाली पहली महिला हैं। उन्हें ऐसे समय इस वित्तीय संगठन के मुख्य आर्थिक सलाहकार की जिम्मेदारी दी गई है, जब आर्थिक वैश्वीकरण की गाड़ी उल्टी दिशा में मुड़ रही है और इससे बहुपक्षीय संस्थाओं के सामने भी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। गीता गोपीनाथ हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाती रही हैं। उन्होंने आईएएमएफ में मौरिस आब्स्टफेल्ड की जगह ली, जो 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए थे। वह मुद्राकोष की चीफ इकोनॉमिस्ट और इसके अनुसंधान विभाग की निदेशक बनाई गई हैं।

 

गीता गोपीनाथ केरल सरकार में रह चुकी हैं आर्थिक सलाहकार

1 अक्टूबर 2018 को उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की तत्कालीन प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने गीता गोपीनाथ को दुनिया का एक विलक्षण और अनुभवी अर्थशास्त्री बताया था। उन्होंने कहा था कि गीता विश्व में महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं। वह IMF की 11वीं मुख्य अर्थशास्त्री हैं। गीता गोपीनाथ जानी-मानी शिक्षाविद् हैं और केरल सरकार में आर्थिक सलाहकार (Economic Advisor) भी रह चुकी हैं।

 

दिल्ली से लेकर हार्वर्ड तक पढ़ाई

भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ का जन्म 8 दिसंबर, 1971 को कोलकाता में हुआ था, लेकिन उनकी प्रारंभ‍कि शिक्षा मैसूर (कर्नाटक) के निर्मला कॉन्वेंट स्कूल से हुई। उनके माता-पिता मूलत: केरल के कन्नूर में रहते थे। पीनाथ ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए किया है। वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन और अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भी रही हैं। उससे पहले वे यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं। उन्होंने अपनी बैचलर्स डिग्री लेडी श्रीराम कॉलेज, नई दिल्ली से हासिल की है।

 

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से किया पीएचडी, पति रह चुके हैं आईएएस

वह भारत के वित्त मंत्रालय के जी-20 सलाहकार समिति में प्रतिष्ठित सदस्य के रूप में भी शामिल रही थीं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय व्यापक अर्थशास्त्र और व्यापार पर किए गए शोध से साल 2001 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि हासिल की है। गीता के पति इकबाल धालीवाल इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट हैं और 1995 बैच के आईएएस टॉपर हैं। इकबाल आईएएस की नौकरी छोड़ प्रिंसटन पढ़ने चले गए थे। गीता अपने पति और एक बेटे के साथ फिलहाल कैम्ब्रिज (यूके) में रह रही हैं।

 

नोटबंदी की कटु आलोचक रही हैं गीता गोपीनाथ

आईएमएफ के सर्वोच्च इकोनॉमिस्ट पद पर चुने जाने के बाद गोपीनाथ का एक बयान काफी सुर्खियों में था। उन्होंने भारत में की गई नोटबंदी की कड़े शब्दों में आलोचना की थी। उनके वे बयान अब वायरल हो रहे हैं। एक इंटरव्यू में गोपीनाथ ने कहा था, कि कोई भी बड़ा अर्थशास्त्री नोटबंदी को जायज़ नहीं ठहरा सकता। गोपीनाथ ने यह भी कहा था कि सभी नकदी न तो कालाधन होता है और न ही भ्रष्टाचार।

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