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अपने समय के क्रांतिकारी कवि, शायर और गीतकार कैफ़ी आज़मी को गूगल ने किया याद

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The Angle

जयपुर।

कैफ़ी आजमी, साहित्य और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का वो नाम हैं, जिन्होंने प्रेम से लेकर क्रांति तक के गीत लिखे। नज्में लिखीं, शायरियां लिखीं और गजलें भी लिखीं और जब कैफ़ी आज़मी इस दुनिया से रुख़सत हुए तो अपने पीछे लेखन की बहुमूल्य विरासत छोड़ गए। उन्हें अनुपमा, हकीकत, कोहरा, दो दिल, हीर- राँझा और कागज के फूल सरीखी फिल्मों के गीतों के लिए खास तौर पर पहचाना जाता है। कैफ़ी आजमी साहब की आज 101वीं जयंती है। कैफ़ी आजमी 20 वीं सदी के भारत के ख्यातनाम कवियों में से एक थे। Google ने भी इस महान हस्ती को अपना डूडल डैडिकेट कर उनकी जयंती पर याद किया।

कैफ़ी महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आन्दोलन से थे प्रेरित

1919 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे सैय्यद अतहर हुसैन रिज़वी उर्फ कैफ़ी आज़मी ने अपनी पहली कविता 11 साल की उम्र में लिखी थी। वे महात्मा गांधी के 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरित थे और बाद में एक उर्दू अखबार के लिए लिखने के लिए मुंबई से चले गए।

 

साहित्य अकादमी फैलोशिप से भी नवाज़े गए कैफ़ी

कैफ़ी आज़मी साहब ने 1943 में अपनी पहली कविता ‘झनकार’ को प्रकाशित किया और प्रभावशाली प्रगतिशील लेखक संघ के सदस्य बने। इन्होंने लेखन का उपयोग सामाजिक आर्थिक सुधारों को करने के लिए किया। कैफ़ी साहब ने उल्लेखनीय काम के लिए कई पुरस्कार और सम्मान भी हासिल किए। इनमें तीन फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, साहित्य और शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार और साहित्य अकादमी फैलोशिप (भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में से एक) शामिल हैं।

 

कैफ़ी ने कविता ‘औरत’ में की महिला समानता की बात

अपनी शुरुआती और सबसे प्रसिद्ध कविताओं में, ‘औरत’ में कैफ़ी आज़मी ने महिलाओं के लिए समानता की बात की थी। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न शैक्षिक पहलों का समर्थन करने के लिए एक एनजीओ की स्थापना की। बता दें कि कैफ़ी आज़मी दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी के पिता हैं।

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