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ना 2021 ना 2024, भारत का लक्ष्य 2028 ओलंपिक्स, यूं हासिल करेंगे लक्ष्य

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द एंगल।

नई दिल्ली।

कोरोना महामारी की वजह से टोक्यो ओलंपिक को भले ही एक साल के लिए टाल दिया गया हो, लेकिन भारत का लक्ष्य 2021 या 2024 नहीं बल्कि 2028 के ओलंपिक की मेडल टेली में टॉप-10 में आना है। इसके लिए भारत ने अभी से तैयारियां करना शुरु कर दिया है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खेल मंत्रालय ने वन स्टेट, वन गेम्स की योजना तैयार की है। इसके लिए 14 खेल चुने गए हैं और इन खेलों को विभिन्न राज्यों ने गोद ले लिया है। इसलिए अब इन राज्यों पर ही इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।

यहां देखें खेल और संबंधित राज्यों की पूरी सूची

ओलंपिक के लिए 5 राज्य तैयार करेंगे बॉक्सर, शूटिंग की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश को

वन स्टेट, वन गेम्स योजना के तहत हरियाणा समेत 5 राज्यों ने ओलंपिक के लिए बॉक्सर तैयार करने की जिम्मेदारी ली है। वहीं दिल्ली समेत 3 राज्यों ने पहलवानों को तैयार करने की जिमेदारी ली है। मध्य प्रदेश अकेला राज्य होगा, जो निशानेबाज तैयार करेगा। जो 14 खेल इसके लिए चुने गए हैं उनमें आर्चरी, बॉक्सिंग, शूटिंग, बैडमिंटन, रेसलिंग, हॉकी, साइक्लिंग, एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस, स्विमिंग, जूडो, फेंसिंग और रोइंग शामिल हैं।

खेल के चलते बाधित नहीं होगी जूनियर खिलाड़ियों की पढ़ाई

जूडो, हॉकी, फेंसिंग और साइक्लिंग के सेंटर शुरू भी हो चुके हैं। इन सेंटरों पर जूनियर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के साथ ही उनकी पढ़ाई का भी इंतज़ाम किया गया है। इसके लिए कई स्कूलों से करार किया गया है।

प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को खेल की जिम्मेदारी

खेल की लोकप्रियता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन के आधार पर राज्यों को खेलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खेल मंत्रालय राज्यों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने और खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग दिलाने में सहयोग करेगा। ऐसा नहीं है कि राज्य अन्य खेलों को भी बढ़ावा नहीं दे सकते हैं, लेकिन इन राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से केवल इनके गोद लिए गए खेल को आगे बढ़ाने में ही सहयोग दिया जाएगा।

पांच राज्यों को बॉक्सिंग को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी

2028 के ओलंपिक के लिए मुक्केबाजों को तैयार करने की जिम्मेदारी पांच राज्यों पर हैं। इनमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, असम, मेघालय और मिजोरम शामिल हैं। बता दें देश को बॉक्सिंग में पहला ओलंपिक मेडल विजेंद्र सिंह ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक गेम्स में दिलाया था। वहीं 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले 9 मुक्केबाजों में से 4 हरियाणा से ही हैं। इसमें पूजा रानी, अमित पांघल, विकास कृष्णन और मनीष कौशिक शामिल हैं। हरियाणा के रोहतक में नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी भी स्थापित की गई है। हरियाणा के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में भी बॉक्सिंग खासा लोकप्रिय है। टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करने वाली महिला मुक्केबाज लवलीना और एमसी मैरीकॉम यहीं से आती हैं।

कुश्ती को दिल्ली, नगालैंड और महाराष्ट्र बढ़ावा देंगे

दिल्ली, नगालैंड और महाराष्ट्र अपने राज्य में कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए आगे आए हैं। इन राज्यों ने वन स्टेट, वन गेम्स के तहत कुश्ती को गोद लिया है और ये ओलंपिक के लिए पहलवान तैयार करेंगे। उल्लेखनीय है कि देश को कुश्ती में दो ओलंपिक मेडल दिलाने वाले सुशील कुमार ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ही खेल की बारीकियां सीखीं हैं। वहीं लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले योगेश्वर दत्त भी दिल्ली में ही प्रैक्टिस करते हैं। टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले दीपक कुमार और बजरंग पूनिया ने भी इसी स्टेडियम से अपने करियर की शुरुआत की है।

महाराष्ट्र के पहलवानों का भी बेहतर प्रदर्शन

वहीं कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर की बात की जाए तो भी दिल्ली और हरियाणा के बाद महाराष्ट्र के पहलवानों का दबदबा रहा है। देश को कुश्ती में 1952 में ओलंपिक में पहला मेडल महाराष्ट्र के केडी जाधव ने ही दिलाया था। वहीं महाराष्ट्र के पहलवान नरसिंह यादव ने 2016 में रियो गेम्स के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन डोपिंग में फंसने के कारण वे नहीं खेल पाए थे।

मध्यप्रदेश में तैयार होंगे निशानेबाज

मध्यप्रदेश ने ओलंपिक के लिए शूटर तैयार करने की जिम्मेदारी ली है। राज्य सरकार की ओर से भोपाल में इंटरनेशनल शूटिंग रेंज बनाया गया है। मध्यप्रदेश के शूटर पिछले कुछ सालों से नेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ट्रैप शूटिंग में मध्यप्रदेश का दबदबा है। मध्यप्रदेश की चिंकी यादव ने 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल में टोक्यो गेम्स के लिए देश को Olympic कोटा दिलाया है।

5 राज्य तीरंदाजी को बढ़ावा देंगे

झारखंड, राजस्थान, छतीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख आर्चरी को बढ़ावा देंगे। झारखंड में टाटा की आर्चरी एकेडमी है। यहां से कई तीरंदाज देश के लिए इंटरनेशनल स्तर पर मेडल जीत चुके हैं। राजस्थान के कई गांवों में आर्चरी काफी लोकप्रिय है। लिम्बा राम जैसे महान ओलंपियन तीरंदाज राजस्थान ने देश को दिए हैं।

Olympic में इन 14 खेलों में भारत का प्रदर्शन

गौरतलब है कि खेल मंत्रालय ने जिन 14 खेलों को वन स्टेट, वन गेम्स के तहत शामिल किया है उनमें भारत ने अब तक कुल 24 मेडल जीते हैं। हॉकी में भारत ने अब तक 8 गोल्ड, 1 सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं जबकि कुश्ती में कुल 4 पदक जीते हैं। इसमें एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज शामिल हैं। वेटलिफ्टिंग में भारत ने इकलौता मेडल 2000 के सिडनी Olympic में जीता था। बैडमिंटन में दो मेडल मिले हैं। पीवी सिंधु ने रियो Olympic में सिल्वर और साइना नेहवाल ने लंदन गेम्स में कांस्य जीता था। Olympic में बॉक्सिंग में दो मेडल मिले हैं। एमसी मैरीकॉम और विजेंद्र कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वहीं शूटिंग में एक गोल्ड सहित चार मेडल मिले हैं। अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड, विजय कुमार और राज्यवर्धन सिंह राठौर ने सिल्वर और गगन नारंग ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है।

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