Home National पश्चिम बंगाल दौरे पर पीएम मोदी, तोड़ा कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का रिकॉर्ड

पश्चिम बंगाल दौरे पर पीएम मोदी, तोड़ा कई पूर्व प्रधानमंत्रियों का रिकॉर्ड

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जयपुर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय पश्चिम बंगाल के दौरे के तहत कल शनिवार शाम कोलकाता पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय वेल्लूरु मठ में रात्रि विश्राम किया। इसी के साथ बेलूरु मठ में रात्रि विश्राम करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। पीएम मोदी इससे पहले केदारनाथ की गुफा में भी रात्रि विश्राम कर चुके हैं। गौरतलब है कि यूं तो इंदिरा गांधी समेत देश के कई पूर्व प्रधानमंत्री बेलूरु मठ का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी वहां रात्रि विश्राम नहीं किया था।

हालांकि पहले पीएम मोदी का रात्रि विश्राम का कार्यक्रम राजभवन में निर्धारित था, लेकिन आखिरी समय में इसे बदलकर बेलूरु मठ कर दिया गया। इसकी मुख्य वजह रविवार को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती होना बताया जा रहा है।

मठ में SPG की ओर से किया गया था सूचित

रामकृष्ण मिशन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया- ‘प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के प्रभारी की ओर से हमें सूचित किया गया था, कि प्रधानमंत्री हमारे मठ में रात व्यतीत कर सकते हैं।’ इसके बाद रामकृष्ण मिशन प्रबंधन की ओर से बेलूरु मठ स्थित इंटरनेशनल गेस्ट हाउस में पीएम मोदी के ठहरने की व्यवस्था की गई। एसपीजी ने शनिवार शाम से ही समूचे बेलूरु मठ परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। मोदी मिलेनियम पार्क में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद, नौसेना की विशेष बोट से रात करीब 9 बजे बेलूरु मठ पहुंचे थे। वहां रामकृष्ण मिशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी स्मरणानंद से मिले।

पीएम मोदी को भोजन में परोसी गई खीर-पूड़ी व मिठाई

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी को बेलूरु मठ पहुंचने पर पहले प्रसाद दिया गया। रात के भोजन में मठ के भोग के साथ ही उन्हें खीर-पूड़ी और मिठाइयां परोसी गईं।

 

प्रधानमंत्री मोदी का रामकृष्ण मिशन से है पुराना नाता

रामकृष्ण मिशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफी पुराना जुड़ाव रहा है। 1966 में किशोरावस्था में मोदी ने स्वामी विवेकानंद की सीख से प्रभावित होकर, गुजरात के राजकोट स्थित मिशन शाखा में जाकर संन्यासी बनने की इच्छा जताई थी। वहां के तत्कालीन प्रमुख स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज, जो बाद में रामकृष्ण मिशन के 15वें अध्यक्ष बने, ने उन्हें संन्यासी नहीं बनने की सलाह देते हुए, लोगों के बीच जाकर काम करने की सलाह दी थी।। इसके बाद मोदी नियमित रूप से स्वामी आत्मास्थानंद जी महाराज से मिलते और उनका आध्यात्मिक मार्गदर्शन लेते रहे। गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी जब भी कोलकाता दौरे पर आते थे, रामकृष्ण मिशन जरूर जाते थे।

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