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मार्च, 2021 तक टला जयपुर एयरपोर्ट के निजीकरण का काम, अडानी ग्रुप अब नहीं दिखा रहा रुचि

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द एंगल।

जयपुर।

कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र जयपुर एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया एक बार फिर टाल दी गई है। फिलहाल इसे आगामी मार्च माह तक के लिए टाल दिया है। एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब मार्च, 2021 के बाद ही जयपुर एयरपोर्ट के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर कोई कार्रवाई शुरु हो सकेगी। इसलिए अभी जयपुर एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया पर विराम लग गया है।

जयपुर एयरपोर्ट पर कोरोना के चलते नई बिल्डिंग के निर्माण का काम भी भीच में अटका

बता दें कोरोना संक्रमण के चलते एयरपोर्ट पर बनने वाली नई बिल्डिंग का काम भी बीच में अटक गया है। दरअसल जयपुर एयरपोर्ट सहित 6 एयरपोर्ट पीपीपी मोड पर अडानी ग्रुप को सौंपने हैं। हालांकि जयपुर एयरपोर्ट के निजीकरण को लेकर अभी केंद्र से मंजूरी नहीं मिली है। इसके साथ ही गुवाहाटी ओर त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट के निजीकरण का काम भी अभी होना बाकी है।

अडानी ग्रुप ने की एसेट ट्रांसफर फीस जमा कराने की डेडलाइन बढ़ाने की मांग

इन तीन एयरपोर्ट के अलावा लखनऊ, अहमदाबाद और मंगलुरु एयरपोर्ट का एमओयू हो चुका है, लेकिन अडानी ग्रुप ने कोरोना वायरस के चलते 6 महीने तक इन पर कब्ज़ा नहीं लेने को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को एक पत्र भी लिखा है। अडानी ग्रुप ने इन तीनों एयरपोर्ट के लिए 1000 करोड़ रुपए जो ऐसेट ट्रांसफर फीस दी जानी है, उसे जमा कराने की डेडलाइन भी अब अगस्त से आगे बढ़ाकर दिसंबर करने की मांग की है।

अडानी ग्रुप निजीकरण को लेकर नहीं दिखा रहा कोई रुचि

इस मामले को लेकर एयरपोर्ट के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस वजह से अडानी ग्रुप पहले से एमओयू हो चुके 3 एयरपोर्ट को लेने में भी पीछे हो रहा है। ऐसे में मार्च से पहले किसी भी स्थिति में जयपुर एयरपोर्ट का निजीकरण होने की संभावना नहीं है। इससे जयपुर एयरपोर्ट पर बनने वाली नई बिल्डिंग का काम भी अटक गया है, क्योंकि यह कार्य निजी कंपनी को शुरू करना था। एयरपोर्ट के विकास संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी अब निजी कंपनी की थी, लेकिन अब कोरोना की वजह से ये सभी काम भी अटक गए हैं। अडानी ग्रुप भी एयरपोर्ट के निजीकरण को लेकर कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।

एमओयू होने के बाद मिली प्रदेश सरकार को जानकारी, जताई थी आपत्ति

उधर एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट के निजीकरण का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार के द्वारा आपत्ति जताई गई थी। इसे लेकर राज्य सरकार का कहना था कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को जयपुर एयरपोर्ट की भूमि जनसुविधा के लिए राज्य सरकार के द्वारा निःशुल्क दी गई थी, लेकिन केंद्र सरकार के द्वारा बिना पूछे जयपुर एयरपोर्ट का एमओयू किया गया।

6 एयरपोर्ट्स के लिए अडानी ग्रुप ने लगाई थी सबसे ज्यादा बोली

गौरतलब है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिसंबर 2018 में देश के छः एयरपोर्ट लखनऊ, अहमदाबाद, बेंगलुरु, गुवाहाटी, जयपुर और त्रिवेंद्रम के निजीकरण पर सहमति बनाई थी। वहीं पिछले साल फरवरी माह में अडानी ग्रुप ने इन सभी 6 एयरपोर्ट के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाई थी और अडानी ग्रुप बोली में विजेता रहा था।

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