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स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2018: सरकार को वादा याद दिलाने के लिए बेरोजगारों ने सोशल मीडिया पर छेड़ी मुहिम

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जयपुर।

प्रदेश के बेरोजगार लंबे समय से नियुक्ति को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने उपचुनाव में इन भर्तियों को जल्द से जल्द से पूरा करने का आश्वासन दिया था। सरकार के आश्वासन के बाद बेरोजगारों ने उपचुनाव में अपने उम्मीदवार खड़े करने का फैसला वापस ले लिया था। अब जब उपचुनाव हो चुके हैं तो बेरोजगारों ने सरकार से रोजगार की मांग की की।

सरकार ने किया था वादा

राज्य सरकार ने तीन सीटों पर हुए उपचुनाव के दौरान बेरोजगारों को जल्द ही रोजगार देने का वादा किया। सरकार के आश्वासन के बाद बेरोजगारों ने उपचुनाव में अपने उम्मीदवारों के नाम वापस ले लिए थे। अब जब उपचुनाव खत्म हो गए हैं और काफी लंबे समय से रोजगार की आस में बैठे बेरोजगार सरकार के जनप्रतिनिधियों को उनका वादा याद दिला रहे हैं।

कोरोना के चलते बेरोजगारों का इंतजार और लंबा हो गया है। इसको देखते हुए उन्होंने सोषल मीडिया प्लेटफार्म पर अब सक्रिय होने लगे हैं। ये स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2018 में कम किए 689 पदों को फिर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। बेरोजगार सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं।
अपनी मांगों को लेकर ये ना तो प्रदर्शन कर रहे हैं और ना ही कोई धरना दे रहे हैं, बल्कि ये सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कार्टून और व्यंग्यात्मक चित्र बनाकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर से कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की मुहिम से सरकार से ध्यान उनकी मांगों पर जाएगा और जल्द ही सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब अन्य भर्ती परीक्षा में आरक्षण का प्रावधान लागू होने पर पदों को बढ़ाया गया तो इसमें क्यों नहीं।

प्रदेश में 2018 में निकली थी भर्ती

प्रदेश में स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2018 के पांच हजार पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। जून 2019 में इडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया। इसके बाद संशोधित विज्ञप्ति निकाकर जुलाई 2019 में परीक्षा की तिथि घोषित की गई। किसी कारणवष यह परीक्षा 2019 में नहीं हो सकी। इसके बाद 2020 में परीक्षा का आयोजन हुई।

परीक्षा के बाद यह आरक्षण मामले को लेकर हाइकोर्ट पहुंच गया। इसके बाद नए आरक्षण नियमों के के चलते 689 जनरल-ओबीसी के अभ्यर्थी बाहर हो गए। इन अभ्यर्थियों की मांग है कि कम किए गए पदों को फिर से जोड़ने की मांग को लेकर इन इन्होंने 22 दिन तक जयपुर में शहीद स्मारक पर धरना दिया था। षिक्षामंत्री के आष्वासन के बाद यह धरना समाप्त हुआ।

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