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भड़ली नवमी पर अंतिम अबूझ सावा आज, पांच महीने तक नहीं हो सकेंगे शुभ काम

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दा एंगल।
जयपुर।
देशभर में आज अंतिम गुप्त नवरात्र बनाया जा रहा है। साथ ही राजस्थान, गुजरात सहित उत्तर और मध्य भारत में भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त के रूप में बहुत ही खास माना जाता है। इसके शुभ मुहूर्त के एक दिन बाद देवशयनी एकादशी आ जाने से अगले 4 महीनों के लिए विवाह, सगाई मुंडन, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। लेकिन इस बार अधिक मास होने से 5 महीने तक देवशयन रहेगा। इसलिए 29 जून के बाद 25 नवंबर से ही विवाह और मांगलिक कामों की शुरुआत हो पाएगी।

भड़ली नवमी पर होता अबूझ मुहूर्त

दरअसल, गुप्त नवरात्रि जिस नवमी तिथि को समाप्त होते हैं, उन्हें भड़ली नवमी कहा जाता है। यह आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है। उत्तर भारतीय इलाकों में ये मान्यता है कि भड़ली नवमी शादी जैसे शुभ संस्कार के लिए एक अबूझ मुहूर्त है। इसके दो दिन बार ही देवशयनी एकादशी है, इस दौरान लगातार चार महीने तक विष्णु भगवान निद्रा में लीन रहते हैं। हिंदू धर्म में इस दौरान कोई भी शुभ काम करने की मना ही होती है। इसके बाद जब देवउठनी एकादशी के दिन जब वो जागते हैं तभी कोई शुभ काम शुरू किए जा सकते हैं। इस वर्ष एक जुलाई को देवशयनी के बाद विवाह अनुष्ठान वर्जित रहेंगे।

मैरिज गार्डन में नहीं रौनक

पहले जहां इस अबूझ सावे पर सैकड़ों शादियां हुआ करती थी वहीं इस साल भड़ला नवमी को सीमित संख्या म विवाह सम्पन्न हो रहे हैं। कारण साफ है कि इस कोरोना वायरस की वजह से सरकार ने विवाह में सीमित लोगों के शामिल होने के लिए कहा है साथ ही कई पाबंदिया होने की वजह से इस बार सब कुछ फीका ही नजर आ रहा है। विवाह तो सीमित हो रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान पंडितों, कैटरिंग के साथ मैरिज गार्डन वालों को उठाना पड़ रहा है। सावे होत हुए भी उनको खाली बैठना पड़ रहा है।

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