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जो बाइडेन ने राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही बदला ट्रंप सरकार का ये बड़ा फैसला

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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन

द एंगल।

वॉशिंगटन।

किसी देश या राज्य में सत्ता परिवर्तन होने पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को पलटना जैसे परिपाटी ही बन चुका है। भारत में तो अक्सर ऐसा देखने को मिलता ही है, अब अमेरिका में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जो बाइडेन ने सत्ता में आते ही अपनी सक्रियता दिखाना शुरु कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि अमेरिका फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में शामिल होगा। बता दें इससे पहले ट्रंप सरकार ने डब्ल्यूएचओ पर कोरोना वायरस को लेकर लगातार चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाया था और खुद को इस वैश्विक संगठन से अलग कर लिया था। साथ ही डब्ल्यूएचओ की फंडिंग भी बंद कर दी थी।

बाइडेन बोले- बाकि दुनिया के साथ मिलकर काम करना सुनिश्चित करना होगा

उल्लेखनीय है कि अप्रैल में वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ से हट जाएगा। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को लेकर दुनिया को गुमराह किया। जिसके कारण इस वायरस से विश्वभर में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बाइडेन ने कहा कि उनका प्रशासन पहले दिन से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन में फिर से शामिल होने जा रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बाकी दुनिया और हम एक साथ मिलकर काम करें।

जो बाइडेन ने चीन को दंडित करने की कही थी बात

वहीं, चीन को लेकर बाइडेन ने कहा कि उसे नियमों का पालन करना होगा और उसी के तहत काम करना पड़ेगा। दरअसल राष्ट्रपति चुनाव की बहस के दौरान उनके बयान को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पर वो आर्थिक प्रतिबंध या टैरिफ लगाएंगे। इसके जवाब में बाइडेन ने कहा था कि जिस तरह से चीन बर्ताव कर रहा है, वह उसे दंडित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चीन को दंडित करने के बारे में नहीं है, बल्कि उसे यह समझाना भी है कि उसे नियमों के तहत ही चलना होगा। यह एक आसान प्रस्ताव है।

चीन-अमेरिकी रिश्तों के लिए बेहद खराब रहे बीते 3-4 साल

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में चार साल चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे खराब दौर रहा। अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिका-चीन संबंधों के सभी पहलुओं पर आक्रामक रुख दिखाया। जिसमें विवादित दक्षिण चीन सागर पर चीन की सैन्य पकड़ को चुनौती देना और कोरोना वायरस को ‘चीन वायरस’ के रूप में पेश करना शामिल है। वहीं चीनी के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडेन से उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संचार को फिर से शुरू करने पर काम करेंगे।

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