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जयपुर पहुंचे एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, भाजपा की परिवर्तन यात्रा पर बोला जोरदार हमला

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जयपुर पहुंचे एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, भाजपा की परिवर्तन यात्रा पर बोला जोरदार हमला (फाइल इमेज)

The Angle

जयपुर।

राजस्थान दौरे पर जयपुर पहुंचे एआईसीसी के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने भाजपा की परिवर्तन यात्रा, आम आदमी पार्टी के राजस्थान चुनाव के मद्देनजर गारंटी कार्ड लॉन्च करने और वन नेशन, वन इलेक्शन जैसे ज्वलंत और समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

भाजपा पर लगाया विधानसभा चुनाव के चलते सिलेंडर के दाम घटाने का आरोप

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भाजपा की परिवर्तन यात्रा को लेकर पूछा कि आखिर भाजपा नेता किस बात का परिवर्तन राजस्थान में चाहते हैं ? राजस्थान में ऐसे कई फैसले लिए गए हैं जो देश में अन्य किसी राज्य में नहीं लिए गए, बात चाहे मुफ्त स्मार्टफोन, बिजली, स्वास्थ्य की हो, या सस्ते सिलेंडर की, सभी कुछ फैसले राजस्थान में किए गए हैं। वहीं अब जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं तो उन्होंने सिलेंडर पर कुछ पैसे कम किए हैं। रंधावा ने कहा कि ये बात सही है कि अगर भाजपा सत्ता में आएगी तो वे परिवर्तन लाएंगे और ये परिवर्तन प्रदेश में चलाई जा रही तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर जनता को मिल रही राहत छीनने का होगा।

आप तो गारंटियां देगी, हमारी सरकार ने गारंटियों को पूरा करना शुरू कर दिया- एआईसीसी प्रभारी

वहीं आम आदमी पार्टी के आज से शुरू होने जा रहे चुनावी अभियान पर कहा कि गारंटियां तो उन्होंने दिल्ली और पंजाब में भी दी थीं, लेकिन पंजाब में इन्हीं की सरकार ने 1500 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। आम आदमी पार्टी के नेता तो गारंटी कार्ड देने आ रहे हैं लेकिन हमने तो जो गारंटियां दी हैं उनका फायदा आज जनता को मिलना शुरू भी हो चुका है।

सुखजिंदर सिंह रंधावा बोले- मध्यप्रदेश कर्नाटक की तरह बीच में सरकार गिरी, तो क्या होगा ?

एआईसीसी प्रभारी ने कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी करने को लेकर कहा कि सितंबर के पहले सप्ताह में तो नहीं, लेकिन सितंबर माह में जरूर प्रत्याशी घोषित कर दिए जाएंगे। संगठन स्तर पर इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं देश में इन दिनों चल रही वन नेशन, वन इलेक्शन की चर्चा को लेकर उन्होंने कहा कि इससे पहले भी देश में 1962 और 1967 में वन नेशन, वन इलेक्शन हो चुके हैं, इसलिए ये कॉन्सेप्ट नया नहीं है। लेकिन वन नेशन, वन इलेक्शन लागू होने के बाद अगर कर्नाटक और मध्यप्रदेश की तरह कोई सरकार बीच में ही गिर गई तो क्या वहां अगले चुनाव तक राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा, इस पर भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। लेकिन सरकार इस पर कुछ नहीं कह रही है, इससे उनकी मंशा पर शक हो रहा है।

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