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राजस्थान में भाजपा की पहली सूची से मिली सीख ‘दुर्घटना से देर भली’, कांग्रेस फूंक-फूंककर रख रही कदम

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राजस्थान में भाजपा की पहली सूची से मिली सीख 'दुर्घटना से देर भली', कांग्रेस फूंक-फूंककर रख रही कदम

The Angle

जयपुर।

राजस्थान विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। कांग्रेस जहां अभी तक नाम फाइनल करने की उधेड़बुन में ही लगी हुई है, वहीं भाजपा ने 41 सीटों पर अपने दावेदार घोषित भी कर दिए हैं। हां ये बात और है कि भाजपा की इस सूची से दुर्घटना से देर भली वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने अपनी श्राद्ध पक्ष में सूची जारी नहीं करने की अपनी पुरानी परंपरा को ताक पर रखकर भले ही पहली लिस्ट जारी कर दी हो, लेकिन इसके साथ ही भाजपा में कितनी एकजुटता है और पार्टी शीर्ष नेतृत्व की हिदायत पार्टी टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों के दिमाग में कितनी अच्छी तरह बैठी, ये भी खुलकर सामने आ चुका है।

भाजपा का राजस्थान में किया गया प्रयोग पार्टी को पड़ेगा बहुत भारी

जानकारों का मानना है कि पार्टी ने पहली सूची के जरिए ये साफ कर दिया है कि कोई भी टिकट प्रदेश स्तर पर नहीं, बल्कि सिर्फ पार्टी शीर्ष नेतृत्व तय कर रहा है। इसलिए भाई-भतीजावाद या अपने चहेतों को टिकट दिलाने की इच्छा पाले बैठे नेताओं को इस बार मन मसोसकर रह जाना होगा। वहीं इसके दूसरे मायने ये भी हैं कि भाजपा सीधे तौर पर पार्टी में अगली पीढ़ी को तैयार करने में जुट गई है। लेकिन राजस्थान में किया गया उनका ये प्रयोग पार्टी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि जनता का इन नेताओं को कितना समर्थन मिलेगा, ये तो बाद की बात है, उससे पहले पार्टी के नेताओं का ही उन्हें समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

सांचौर से प्रत्याशी देवजी पटेल, विद्याधर नगर से दीया कुमारी, देवली-उनियारा से विजय बैंसला, किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी कुछ ऐसे ही नेता हैं जिन्हें टिकट मिलते ही इनका विरोध भी शुरू हो गया है।

भाजपा शीर्ष नेतृत्व को नरपत सिंह राजवी ने दे दिया दो टूक मैसेज

टिकट मिलने के बाद सांचौर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचते ही देवजी पटेल का स्वागत जहां पार्टी के अन्य दावेदारों के समर्थकों ने काले झंडे दिखाकर और उनके काफिले की गाड़ियों पर कथित रूप से पथराव करके किया, वहीं दीया कुमारी के विरोध में भी मौजूदा विधायक नरपत सिंह राजवी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने एक समाचार पत्र को दिए अपने साक्षात्कार में साफ तौर पर कहा कि आखिर पार्टी की शीर्ष नेतृत्व की ऐसी क्या मजबूरी है कि उन्हें मुगलों के सामने घुटने टेकने वाले परिवार के सामने झुकना पड़ रहा है। राजवी का ये एक बयान ये बताने के लिए काफी है कि वे दीया कुमारी के समर्थन में बिलकुल भी नहीं हैं और हो सकता है कि चुनाव के दौरान उनकी तरफ से दीया कुमारी का विरोध भी किया जाए।

राजपाल सिंह शेखावत ने अपना टिकट कटने पर जताई नाराजगी

वहीं पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने भी झोटवाड़ा से राज्यवर्धन सिंह शेखावत को टिकट देने और उनका टिकट काट देने पर भारी आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यहां तक कहां कि पार्टी की पहली सूची को देखकर कहीं से भी यह नहीं लगता कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। संकेत साफ हैं कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने वसुंधरा समर्थकों के टिकट काटने का जो दांव खेला है, वो पार्टी को आगामी चुनाव में बहुत भारी पड़ने वाला है।

विजय बैंसला को पार्टी कार्यकर्ता बता रहे बाहरी प्रत्याशी, हो रहा जमकर विरोध

इसी तरह भाजप के अन्य प्रत्याशियों की बात करें तो देवली-उनियारा में विजय बैंसला को बाहरी प्रत्याशी बताते हुए जमकर विरोध हो रहा है। पार्टी कार्यकर्ता पार्टी दफ्तर पहुंचे और बीजेपी अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत के सामने अपना पक्ष रखा। उधर किशनगढ़ से प्रत्याशी बनाए गए भागीरथ चौधरी को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यहां विकास चौधरी बीजेपी से टिकट मांग रहे थे, जो कि 2018 में भी पार्टी के प्रत्याशी रह चुके हैं। लेकिन जैसे ही पार्टी ने उनकी जगह भागीरथ चौधरी को टिकट दिए जाने का ऐलान किया, तो वे अपने समर्थकों के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़े।

गलत टिकट वितरण मेहनत पर पानी न फेर दे इसलिए फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही कांग्रेस

जानकारों की मानें भाजपा खेमे से सामने आते ये नजारा कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी एक नसीहत है कि अगर उन्होंने टिकट में चूक की, तो तस्वीर उनके यहां भी देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि सितंबर के पहले सप्ताह में टिकट आवंटन का दावा करने वाली कांग्रेस में इसीलिए टिकट फाइनल करने में देरी हो रही है। ताकि गहलोत सरकार के 5 साल के सुशासन पर कहीं गलत टिकट वितरण पानी न फेर दे और इसी लिए कांग्रेस पार्टी फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है।

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