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कांग्रेस में राजस्थान के लिए टिकटों पर मंथन जारी, महेश जोशी, शांति धारीवाल, धर्मेंद्र राठौड़ पर संशय बरकरार

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कांग्रेस में राजस्थान के लिए टिकटों पर मंथन जारी, महेश जोशी, शांति धारीवाल, धर्मेंद्र राठौड़ पर संशय बरकरार

The Angle

जयपुर।

कांग्रेस में टिकटों को लेकर राजस्थान के बाद अब दिल्ली में जोर आजमाइश और मंथन चल रहा है। हाल ही में जयपुर में पीईसी की मीटिंग हुई थी, जिसमें पहली सूची के संभावित दावेदारों का पैनल तैयार किया गया था। इसके बाद कल दिल्ली में कांग्रेस वॉर रूम में करीब 5 घंटे तक चली बैठक में पैनल में मिले नामों और उन्हें लेकर किए गए सर्वे के फीडबैक को क्रॉस चेक किया गया। चर्चा है कि इस दौरान निर्विवाद सीटों पर मंथन हुआ, जहां पार्टी को चुनाव में जीत हासिल करने में कोई परेशानी नहीं आएगी।

कांग्रेस के सीनियर ऑब्जर्वर से मिलने पहुंचे थे महेश जोशी, धर्मेंद्र राठौड़

लेकिन प्रदेश के 3 नेताओं को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल हाल ही में मुख्यमंत्री गहलोत ने एक बयान में कहा था कि हर पार्टी में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं, हमारे यहां भी बीते 5 सालों में ऐसा हुआ है, लेकिन अब हम इन सब बातों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं और पूरी पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहती है। दूसरी ओर हाल ही में मंत्री महेश जोशी और आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के दिल्ली में राजस्थान विधानसभा चुनाव के सीनियर ऑब्जर्वर मधुसूदन मिस्त्री से मुलाकात की भी खबर थी।

महेश जोशी, धर्मेंद्र राठौड़ का कट सकता है टिकट, शांति धारीवाल की जगह बेटे को मिल सकता है मौका

ऐसे में इस बात पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि क्या कांग्रेस 2023 के चुनाव में राजस्थान में मंत्री महेश जोशी, शांति धारीवाल और आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ को टिकट देगी। इस बात की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि कुछ समय पहले ही कांग्रेस अनुशासन समिति की ओर से 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम को लेकर तीनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। बाद में इन्हें क्लीन चिट देने की भी चर्चा थी।

लेकिन अब माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने इन्हें क्लीन चिट सिर्फ संगठन में काम करने के लिए दी थी। ऐसे में इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी इस बार के चुनाव में महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ को टिकट न दे और शांति धारीवाल की जगह इस बार उनके बेटे अमित धारीवाल को चुनावी मैदान में उतारा जाए। माना जा रहा है कि इस तरह कांग्रेस पार्टी यह भी मैसेज देना चाहेगी कि जो पार्टी का अनुशासन तोड़ेगा, उसे इसकी सजा तो जरूर मिलेगी ही।

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