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बीजेपी की परिवर्तन यात्रा से पहले वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा,क्या पार्टी को दिखाएगी राजे अपनी ताकत ?

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वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर से धार्मिक यात्रा करने जा रही है .सबसे बड़ी बात ये है कि ये राजे की धार्मिक यात्रा बीजेपी की परिवर्तन यात्रा से ठीक पहले शुरु होने जा रही है .इसी क्रम में राजे ने शुक्रवार यानी 1 सितंबर को परिवर्तन यात्रा से ठीक एक दिन पहले देव दर्शन का प्लान बनाया है .और पूर्व मुख्यमंत्री की देव दर्शन की शुरुआत राजसमंद जिले में स्थित चारभुजा मंदिर से होगी.आपको बता दे यहा राजे ने पहले 2013 और 18 में भी यात्रा की शुरुआत की थी.

वसुंधरा की धार्मिक यात्रा के मायने

राजे की इस धार्मिक और देवदर्शन यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे है .आपको बता दे बीजेपी में इस बार परिवर्तन यात्रा में कोई भी चेहरा नहीं है .सबसे बड़ी बात ये है कि चारों परिवर्तन यात्राओं में वसुंधरा राजे पार्टी का चेहरा नहीं है .सभी बड़ी यह है कि इस धार्मिक यात्रा के बदौलत वसुंधरा राजे अपनी छवि को क्राउड कैचर वाली दिखाना चाहती है .और ऐसा हमेशा से ही होता आया है .कि राजे की सभाओं और यात्राओं में हमेशा भीड़ ही देखी जाती है .

वसुंधरा की यात्रा का रुट परिवर्तन से अलग

राजे ने अपनी धार्मिक यात्रा में उन स्थानों को चुना है, जहां से बीजेपी की परिवर्तन यात्रा सीधे तौर पर नहीं गुजरेगी।वसुंधरा राजे का धार्मिक स्थानों से शुरू से लगाव रहा है, लेकिन उनकी कभी भी कट्टर हिंदूवादी छवि नहीं रही। इस बार परिवर्तन यात्रा से पहले राजे की देव दर्शन यात्रा को उनके प्रदेश में खुद को हिंदूवादी चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने के रूप में भी देखा जा रहा हैं।

जोशी को दी राजे ने चुनौती

आपको बता दे कि जब प्रदेश में परिवर्तन यात्राओ के कार्यक्रम फाइनल हो रहे थे .जब चर्चाएं ऐसी थी कि वसुंधरा राजे को सवाईमाधोपुर से शुरु होने वाली परिवर्तन यात्रा की जिम्मेदारी दी जा सकती है .वहीं, डूंगरपुर के बेणेश्वरधाम से शुरू हो रही यात्रा की कमान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी के हाथ में रहेगी। लेकिन राजे दूसरी यात्रा की कमान अपने पास रखना चाहती थी.क्योंकि इस यात्रा के रुट में उनका निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ शामिल है .वहीं, पूर्वी राजस्थान में ईआरसीपी के मुद्दे के कारण बीजेपी की स्थिति भी अच्छी नहीं है। राजे का मानना था कि यह स्थिति केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के कारण हुई है। ऐसे में वो क्यूं इस यात्रा की जिम्मेदारी अपने ऊपर लें।

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